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किसी व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव या चरित्र की असली पहचान कब होती है। Nitish Pandey Bihar wale




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1. मित्र की परख संकट के समय होती है।


> जब तुम खुश हो, सफल हो, पैसा है — तब सब तुम्हारे दोस्त बनते हैं। लेकिन जब तुम बीमार हो जाओ, नौकरी छूट जाए, या कठिनाई आए — तब जो दोस्त तुम्हारे पास खड़ा रहे, वही असली मित्र है।
उदाहरण:
राहुल के पास जब बिज़नेस अच्छा चल रहा था, बहुत दोस्त थे। पर जब उसका बिज़नेस डूब गया, तो सिर्फ अमित ही आया उसकी मदद करने — यही असली दोस्ती है।




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2. सेवक की परख धन आते ही होती है।


> जब तुम साधारण हो, तो नौकर या कर्मचारी तुम्हारे साथ ठीक व्यवहार करते हैं। पर जैसे ही तुम्हारे पास पैसा आ जाता है, तब कुछ चापलूस बन जाते हैं और कुछ जलने लगते हैं। तभी असली सेवक की निष्ठा का पता चलता है।
उदाहरण:
जब विशाल के पास बड़ी नौकरी लगी, उसका ड्राइवर चंद्रू पहले जैसा ही विनम्र और मेहनती रहा — जबकि बाकी नौकर बदल गए।




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3. पति की परख पत्नी के दुःख में होती है।


> जब पत्नी बीमार हो जाए, नौकरी छोड़ दे या मानसिक तनाव में हो — तब पति कैसा व्यवहार करता है, वहीं उसकी असली परख होती है।
उदाहरण:
अंकित की पत्नी एक्सीडेंट में घायल हो गई थी। अंकित ने दिन-रात सेवा की, ना कि दूरी बनाई — यही सच्चा पति है।




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4. पत्नी की परख पति के दरिद्र होने पर होती है।


> जब पति की नौकरी चली जाए, व्यापार में घाटा हो जाए, आर्थिक तंगी आ जाए — तब पत्नी अगर साथ छोड़ दे, तो उसका प्रेम दिखावटी था।
उदाहरण:
राहुल जब बेरोजगार हुआ, तो उसकी पत्नी प्रियंका ने घर खर्च चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया — यही निष्ठा है।




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5. भाई की परख संपत्ति के बँटवारे में होती है।


> जब जायदाद या पैतृक संपत्ति बँटती है, तब असली भाईचारा दिखाई देता है — कुछ स्वार्थी बन जाते हैं, कुछ त्याग करते हैं।
उदाहरण:
अभय और विजय ने पिता की संपत्ति आपसी सहमति से बाँट ली और आज भी भाई जैसे हैं, जबकि कई परिवार इस पर टूट जाते हैं।




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6. गुरु की परख विपरीत समय में होती है।


> जब तुम्हारी ज़िंदगी में असफलता या भटकाव आए, तो सच्चा गुरु वही होता है जो तुम्हें सहारा दे, न कि त्याग दे।
उदाहरण:
जब आदित्य प्रतियोगी परीक्षा में बार-बार फेल हो रहा था, तब उसके कोच ने उसे हिम्मत दी और लगातार मार्गदर्शन किया — वही असली गुरु था।




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7. शिष्य की परख शिक्षा पूर्ण होने पर होती है।


> जब सारी शिक्षा पूरी हो जाए, डिग्री मिल जाए — तब व्यवहार से पता चलता है कि वह शिष्य विनम्र है या घमंडी।
उदाहरण:
मयंक ने इंजीनियरिंग पूरी कर ली, पर वह आज भी अपने गुरुजनों को आदरपूर्वक प्रणाम करता है — असली संस्कार है।




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8. रिश्तेदारों की परख मृत्यु और विवाह जैसे अवसरों पर होती है।


> जब घर में शादी या किसी की मृत्यु होती है, तब रिश्तेदारों का असली स्वभाव सामने आता है — कोई मदद करता है, कोई सिर्फ मतलब से आता है।
उदाहरण:
सौरव की बहन की शादी में कुछ चाचा-मामा बिना बुलाए भी आए और मदद की, पर कुछ ने सिर्फ गिफ्ट लेने के लिए आकर फॉर्मेलिटी निभाई।




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9. व्यापारी की परख लेन-देन में ईमानदारी से होती है


> जब पैसा दाँव पर हो, तब व्यापारी की सच्चाई दिखती है — वह सही माप-तोल करता है या धोखा देता है।
उदाहरण:
सिद्धार्थ ने एक ग्राहक को गलती से ज्यादा सामान दे दिया था। उसे महसूस होते ही फोन कर वापस बुलाया — यही सच्चा व्यापारी धर्म है।




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10. नेता की परख सत्ता मिलने के बाद होती है।


> जब तक नेता को सत्ता नहीं मिलती, वह झुककर जनता से बात करता है। लेकिन सत्ता मिलने के बाद उसका व्यवहार बदल जाए, तो असली चेहरा दिखता है।
उदाहरण:
संदीप वार्ड में जीतने के बाद भी हर रविवार जनता से मिलने आता है, समस्याएँ सुनता है — असली जनसेवक यही है।




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छोटा सारांश:


> जीवन में हर रिश्ते की परख तब होती है जब समय कठिन होता है, या जब सफलता/सत्ता/धन आता है। सामान्य समय में सब अच्छे लगते हैं, पर असली पहचान कठिनाइयों में होती है।

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